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    • DISTRICT COURT KANKER

      DISTRICT COURT KANKER

    न्यायालय के बारे में

    कांकेर राज्य को मराठों से सरकार की सेवा में 500 लोगों को नि:शुल्क भेजने की शर्त रखी गई थी, जब भी ऐसा करने की आवश्यकता होती थी। 1809 में कांकेर के मुखिया को उसकी संपत्ति से वंचित कर दिया गया। 1818 में नागपुर में ब्रिटिश रेजिडेंट के अधीन 500 रुपये के वार्षिक भुगतान पर कांकेर राज्य को बहाल किया गया था। इसे 1823 में माफ कर दिया गया था।

    महाराजाधिराज नरहरदेव का जन्म 1850 में हुआ था और वे 1853 में "गुड्डी" के उत्तराधिकारी बने। 1889 में राज्य का प्रशासन करने के लिए एक दीवान नियुक्त किया गया। बजट के लिए पॉलिटिकल एजेंट से वर्षवार परामर्श लेना चाहिए, यह शर्त थी. 9 मई 1903 को, चोर की बिना किसी समस्या के मृत्यु हो गई, और उसके भतीजे लाल कोमल देव ने उसका उत्तराधिकारी बना लिया, महाराजाधिराज की वंशानुगत उपाधि के साथ, उसे 12 दिसंबर 1911 को 9 तोपों की व्यक्तिगत सलामी दी गई और 8 जनवरी 1925 को उसकी मृत्यु हो गई। 1892 से दीवान राज्य का बजट बनाते थे जिसे तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाता था। 1903 में भूमि और भू-राजस्व के संबंध में नागरिक कानूनों के लिए तत्कालीन दीवान श्री दुर्गा प्रसाद तिवारी द्वारा एक[...]

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    श्री रमेश सिन्हा
    माननीय मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा
    Honble Judge
    पोर्टफोलियो जज माननीय न्यायमूर्ति श्री अमितेंद्र किशोर प्रसाद
    Shri Sanjeev Kumar Tamak_pdj
    प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री संजीव कुमार टामक
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